Techmax
Please Wait a Moment
Menu
Dashboard
Register Now
Exercise 20 (Mangal)
Font Size
+
-
Reset
Backspace:
0
Timer :
00:00
महोदय, मैं अपने बारे में कहता हूँ। जब मैं छोटा था और कालेज में पढ़ रहा था तब रूस और जापान के बीच युद्ध छिड़ा। उस समय, समाचार पत्रों में जापान के संबंध में बहुत-सी बातें छपा करती थीं। उनमें एक बात यह भी थी कि जापान में समुरिया जाति के लोगों ने अपने सब अधिकार वहाँ के राजा को दे दिए थे। उसके बाद जापान बड़ी उन्नति कर सका। हम लोग यह पढ़कर आश्चर्य और सराहना करते थे। उससे बढ़कर हमारे यहाँ के लोगों ने स्वराज्य स्थापित होने के बाद एक-दो वर्ष में एक उदाहरण उपस्थित करके दिखाया। हम भी अपने हजारों वर्षों के इतिहास को नहीं भूलेंगे। जो रियासतें अलग-अलग स्थापित हो गई थीं और एक प्रकार से भारत कई टुकड़ों में बँटा हुआ था, वे सब टुकड़े एक हो गए। आज ब्रिटिश भारत और देशी रियासतें मिलकर एक हो गई हैं।उसके बाद हमारे सामने यह प्रश्न आया कि भारत के लोग केवल स्वराज्य से ही सुखी नहीं हो सकते। उनको किसी न किसी प्रकार सुखी बनाना है। इस संबंध में सरकार ने अपनी ओर से प्रायः सभी राज्यों में जमींदारी और जागीरदारी उन्मूलन के क़ानून उपस्थित किए और वे क़ानून पास हुए। प्रसन्नता की बात तो यह है कि बहुत-से स्थानों में क़ानून उन लोगों की स्वीकृति से तथा उन लोगों की सलाह से पास किए जिनकी जमींदारी और जागीरदारी समाप्त हो जानी थी। यह भी देश-प्रेम का उदाहरण है। उन लोगों ने अपनी संपत्ति का त्याग इसलिए किया कि उससे सारे देश को लाभ पहुँचे। वह काम भी लगभग पूरा हो गया और पूरा होता जा रहा है। हमारे सामने मार्ग प्रशस्त है और अब हमें इस पर चलने की शक्ति चाहिए ।हममें परस्पर कभी-कभी इस प्रकार की संकुचित धार्मिक अथवा | सामाजिक भावना देखने में आती है जिसके कारण कभी-कभी लड़ाई-झगड़े हो जाते हैं। हम इस चीज को भी दूर करने का प्रयत्न कर रहे हैं। हमारे संविधान में स्पष्ट बता दिया गया है कि कोई चाहे किसी भी धर्म का क्यों न हो, किसी भी जाति. का क्यों न हो, इस देश में सबको समान अधिकार है। गरीब से गरीब आदमी को भी वही एक वोट देने का अधिकार है जो कि राजा साहब को है या मुझे। धर्म के नाम पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता है। (377)
Submit
Submit Test !
×
Do you want to submit your test now ?
Submit
Close